मुनिता विश्वकर्मा: शिक्षा और सरकारी स्कूलों में बदलाव की कहानी

Jan 28, 2026

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर ज़िलेके जुडियान गाँव की मुनिता विश्वकर्मा आज अपने बेटे निखिल की पढ़ाई को देखकर बहुत खुश हैं। निखिल गाँव के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में दूसरी कक्षा का छात्र हैऔर पिछले दो सालों से वहीं पढ़ाई कर रहा है। मुनिता का मानना है कि सरकारी स्कूलों मेंअब पहले से बहुत अच्छा बदलाव आया है, जिससे बच्चों को सीखने में न के वल मज़ा आता है, बल्कि उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

मुनीता विश्वकर्मा, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश

मुनिता खुद भी पढ़ाई करना चाहती थीं, और उन्होंने कॉलेज में दाखिला लिया था, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों की वजह से उनकी पढ़ाई पूरी नहीं हो सकी। अब वह चाहती हैं कि उनके बच्चे पढ़-लिखकर जीवन में सफलता हासिल करें। उनके लिए पढ़ाई केवल एक शिक्षा नहीं, बल्कि एक ऐसा साधन है, जिससे भविष्य मेंअच्छा जीवन जीने का रास्ता मिलता है।

“पढ़ाई से ही भविष्य बनता है। मैं चाहती हूँ कि निखिल आगे बढ़े और अच्छा इंसानबने,” मुनिता कहती हैं।

निखिल के स्कूल में बदलाव के बाद उनकी पढ़ाई के तौर-तरीके में भी सुधार आया है। अब पढ़ाई के वल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि खेल-खेल मेंऔर गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को सिखाया जा रहा है। इन बदलावों का बड़ा कारण निपुण भारत अभियान है, जो बच्चों के बुनियादी शिक्षा स्तर को सुधारने के लिए शुरू किया गया है। इस अभियान के तहत, बच्चों को सही तरीके से पढ़ने, लिखने और गिनती करने की क्षमता दी जा रही है।

 निखिल, छात्र-कक्षा 2, राजकीय प्राथमिक विद्यालय, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश

“अब पढ़ाई खेल-खेल में होती है। निखिल का ध्यान पढ़ाई में पूरी तरह लगा रहता है, और वह रोज़ अपना होमवर्क समय सेकरता है,” मुनिता मुस्कुराकर बताती हैं।

निखिल की अध्यापिका भी बहुत मेहनती और सहयोगी हैं। वह बच्चों को बहुत प्यार और समझदारी सेपढ़ाती हैं। निखिल जब घर आता है, तो अपनी मैम की बहुत तारीफ करता है। यह देखकर मुनिता को यह लगता है कि सही शिक्षण पद्धतियाँ बच्चों के लिए बहुत प्रभावी हैं। माता-पिता की भूमिका के बारे में मुनिता कहती हैं, अगर हम ध्यान नहीं देंगे, तो बच्चा कहीं और ध्यान लगाने लगेगा। स्कूल से आने के बाद हमें देखना चाहिए कि वह क्या कर रहा है। वह निखिल को ट्यूशन नहीं दिलातीं, बल्कि खुद ही उसकी पढ़ाई में मदद करती हैं। इस बात को स्कूल में हुई पैरेंट्स-टीचर मीटिंग में भी कहा गया था कि बच्चों की शिक्षा में माता-पिता का सहयोग बहुत ज़रूरी है।

मुनिता की यह कहानी यह दिखाती हैकि जब स्कूल मेंअच्छा माहौल हो, शिक्षक मेहनती हों और माता-पिता का पूरा समर्थन मिले, तो किसी भी बच्चे की तरक्की को कोई नहीं रोक सकता। सरकारी स्कूलों में भी अब ऐस वातावरण बन रहा है जहाँ बच्चे सीखने के लिए उत्साहित रहते हैं। और यह बदलाव निपुण भारत अभियान जैसे प्रयासों की बदौलत संभव हुआ है।

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