सुमैय्या: बुनियादी सीख से बड़े सपनों तक

Jan 28, 2026

गाज़ियाबाद के डिडोली गाँव में रहने वाली दूसरी कक्षा की छात्रा सुमैय्या आठ सदस्यों वाले परिवार में बीच की संतान है।उसके पिता, मोहम्मद शहज़ाद, मुराद नगर में अल्मारियाँ बनाने का काम करते हैं, जबकि उसकी माँ घर की देखभाल करती हैं। 

सुमैय्या, छात्रा, कक्षा 10, समेकित राजकीय विद्यालय, गाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश

स्कूल सुमैय्या का दूसरा घर बन गया है, और उसे वहाँ समय बिताना बहुत पसंद है। निपुण भारत मिशन के बुनयादी साक्षरता और संख्यात्मक (FLN) कार्यक्रम की मदद से उसने अपनी पढ़ाई में काफ़ी सुधार किया है।

जबसे उसके स्कूल में निपुण भारत मिशन के तहत बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक कार्यक्रम लागू हुआ है, तबसे सुमैय्या ने न केवल जरूरी कौशलों को सीखा है, बल्कि अपनी पढ़ाई में एक नया आत्मविश्वास भी पाया है।

वह मुस्कुराते हुए कहती है, “पहले मुझे थोड़ी बहुत ही गिनती आती थी, लेकिन अब मैं 100 तक गिन सकती हूँ, और जोड़-घटाव के सवाल खुद से हल करना भी सीख गई हूँ।”

सुमैय्या की प्रगति केवल अंकों तक सीमित नहीं है; उसका हिंदी के प्रति प्रेम भी गहरा हुआ है। अब वह नई कहानियों को बड़े उत्साह से पढ़ती है, उन्हें याद करती है और घर पर अपनी पढ़ने की क्षमता का अभ्यास करती है। उसकी शिक्षिका पूजा मैम पढ़ाई को मज़ेदार बनाने के लिए समूह गतिविधियों और खिलौनों के माध्यम से इंटरैक्टिव पाठ जैसे रचनात्मक तरीकों का उपयोग करती हैं।  स्कूल का सहयोगपूर्ण माहौल और उसकी स्वाभाविक जिज्ञासा ने उसे कक्षा में अपने छोटे साथियों की मदद करने के लिए प्रेरित किया है।

सुमैय्या अपनी माँ के साथ

वह अक्सर अपनी दोस्त को वही सिखाती है जो उसने खुद सीखा होता है। इस मजबूत नींव और अटूट जिज्ञासा के साथ, सुमैय्या अब पहले से कहीं अधिक प्रेरित है — वह हर दिन मेहनत से पढ़ती है ताकि एक दिन डॉक्टर बनने के अपने सपने को पूरा कर सके और ज़रूरतमंदों के जीवन में आशा की किरण ला सके।

सुमैय्या के मन में ज़िम्मेदारी की भावना भरी हुई है और वह एक बेहतर भविष्य का सपना देखती है। अपने माता-पिता की मेहनत से प्रेरित होकर उसने ठान लिया है कि वह डॉक्टर बनेगी।

सुमैय्या कहती है, “जब मैं बड़ी हो जाऊँगी, तो डॉक्टर बनकर लोगों की जान बचाऊँगी। मैं ग़रीबों की मदद करना चाहती हूँ ताकि वे इलाज के अभाव में अपनी जान न खो दें।”

सुमैय्या के लिए पढ़ाई केवल एक ज़िम्मेदारी नहीं, बल्कि आनंद का स्रोत है। अपने शिक्षकों के सहयोग और परिवार के प्रोत्साहन से सुमैय्या का भविष्य उज्ज्वल है।

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